अलीगढ़, मार्च 12 -- अलीगढ़। हजरत अली की शहादत को लेकर लियाकत बाग में स्थित कर्बला में लोगों ने फूल अर्पित किए। वहीं, सर सैयद नगर स्थित खांकाह नियाज़िया में मजलिस हुई। डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी ने कहा कि रमज़ान के दिनों में वह दुनिया से रुख़सत हुए। हजरत अलीؑ ज्ञान, उदारता, नैतिकता के प्रतीक थे। वह लोगों को राह दिखाते थे। बोझ उठाने वालों की मदद करते। हज़रत अलीؑ का व्यक्तित्व केवल बहादुरी और ज्ञान तक सीमित नहीं था, बल्कि इंसानियत की सेवा, तक़वा, नफ़्स की साधना, न्याय और बलिदान में भी सर्वोच्च था। मजलिस के बाद फातिहा और लंगर वितरित किया गया। इस अवसर पर अली जमां नियाजी, अली फखरी नियाजी, अली हसनैन नियाजी, सरवर अजीम नियाजी, हैदर अली नियाजी, करीम नियाजी, रूहान नियाजी, हाफिज फरकान नियाजी, आतिफ नियाजी, सफदर नियाज़ी, जाफर नियाज़ी मौजूद रहे। ऑल इंडिया...