नई दिल्ली, जून 25 -- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स अधिनियम, 2010 में संशोधनों को अधिसूचित किया है। इसके तहत नियमों के पालन में मामूली कमी अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। इससे बेवजह की मुकदमेबाजी का बोझ घटेगा। यह कदम जन विश्वास सुधारों के तहत उठाया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस कानून का उद्देश्य विभिन्न केंद्रीय कानूनों के तहत नियमों के पालन में मामूली कमी को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और विश्वास आधारित शासन को बढ़ावा देना है। मंत्रालय ने कहा कि इन सुधारों से स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा। मामूली प्रक्रियागत चूक के मामलों में संतुलित कार्रवाई संभव होगी। साथ ही क्लिनिकल संस्थानों पर संबंधित विभागों की निगरानी भी बनी रहेगी। कुछ उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड को हटाकर प्रशासनिक निर्णय तंत्र ला...