नवादा, जनवरी 1 -- नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। सर्दियों की दस्तक के साथ ही अगर नवादा की गलियों में सोंधी खुशबू तैरने लगे, तो समझ लीजिए कि तिलकुट तैयार हो रहा है। नवादा जिले के हिसुआ से निकली यह मिठास आज सिर्फ बिहार या भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी मांग सात समंदर पार सऊदी अरब, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुल्कों में भी जबरदस्त तरीके से बढ़ गई है। इन देशों के लिए नवादा से हर साल करीब 50 क्विंटल से अधिक तिलकुट निर्यात होता है। तिलकुट का जिक्र आते ही अक्सर लोगों के जेहन में गया का नाम आता है, लेकिन इतिहास के पन्ने और बुजुर्गों के अनुभव बताते हैं कि इस अद्भुत मिठाई की कला का असली उद्गम स्थल नवादा जिले का हिसुआ है। दशकों पहले हिसुआ के कारीगरों ने तिल और गुड़ (या चीनी) के मेल से एक ऐसी विधि ईजाद की, जो अपनी शुद्धता और कुरकुरेपन के कारण देखते...
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