स्वराज की अवधारणा में 'स्व' का विस्तार है : प्रो. आनंदी
कौशाम्बी, अगस्त 17 -- स्वाधीनता पर्व पर 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत सोमवार को भवंस मेहता महाविद्यालय भरवारी में 'स्वराज की संकल्पना' विषयक एक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने स्वराज की संकल्पना विषय पर व्याख्यान दिया। मुख्य वक्ता प्रसिद्ध गांधीवादी चिंतक और विचारक प्रो. कृष्णस्वरूप आनंदी ने कहा कि संविधान में स्वराज का उल्लेख कहीं नहीं है, जबकि स्वाधीनता आंदोलन में स्वराज की महत्वपूर्ण भूमिका है। गांधी ने 'हिंद स्वराज' पुस्तक लिखकर स्वराज की केंद्रीय अवधारणा प्रस्तुत की थी। स्वराज में सत्ता का विकेंद्रीकरण था। एक इकाई ग्राम था। गांव से लेकर केंद्र तक सत्ता के कई स्तर थे। आज लगभग पूरी दुनिया में सत्ता केंद्रीकृत होती गई है। केंद्रीकरण की इस प्रक्रिया में तमाम इकाइयां व तमाम समुदाय पीछे छूटते गए। स्वराज में 'स्व' का...
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