मुजफ्फरपुर, मार्च 22 -- मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। आजादी की लड़ाई में किसी एक क्षेत्र ने अगर बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभाई, तो वह बिहार का तिरहुत इलाका था। हालांकि आंदोलनों की शुरुआत महात्मा गांधी के चंपारण आने के काफी पहले ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन इसकी तीव्रता चंपारण सत्याग्रह के बाद ही बढ़ी। शहर के कच्ची पक्की स्थित विश्वविभूति पुस्तकालय में रविवार को आयोजित प्रो. उदयशंकर स्मृति व्याख्यान में प्रसिद्ध गांधीवादी चिंतक भैरवलाल दास ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कंपनी सरकार और बाद में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लोगों ने लोटा आंदोलन, किसान आंदोलन और तीन कठिया आंदोलन शुरू किया। खासकर तीन कठिया आंदोलन की पृष्ठभूमि में महात्मा गांधी मुजफ्फरपुर होते हुए चंपारण पहुंचे। चंपारण सत्याग्रह के कारण ही तिरहुत क्षेत्र से ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन दे...
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