मुरादाबाद, अगस्त 13 -- सलमान हसन खान मुरादाबाद। 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम केवल अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह नहीं था, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता, त्याग और मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान का ऐसा अध्याय था, जिसे मुरादाबाद ने अपने खून से लिखा। यहां मौलवी किफ़ायत अली उर्फ काफ़ी मुरादाबादी और गुलाब राय जैसे वीरों ने यह साबित कर दिया था कि जब देश की बात आती है, तब धर्म और जाति की दीवारें स्वतः मिट जाती हैं।

क्रांति की चिंगारी 1857 में जब मुरादाबाद में क्रांति की चिंगारी भड़की तो मौलवी किफ़ायत अली ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उत्तर भारत का पहला इंकलाबी फ़तवा जारी किया। इस फ़तवे ने शहर के हिंदुओं और मुसलमानों को एक सूत्र में बांध दिया। देशभक्तों ने गीता और कुरान पर हाथ रखकर मातृभूमि की रक्षा की शपथ ली। अंग्रेज अधिकारियों में ऐसा भय व्याप्...