लखनऊ, जनवरी 9 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। स्मार्ट प्रीपेड मीटर और निजीकरण के खिलाफ देश के सभी उपभोक्ता संगठनों को एक मंच पर लाया जाएगा। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इस मामले में अब आर-पार की लड़ाई छेड़नी होगी। अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली वितरण का आधारभूत ढांचा सुधारने और स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के लिए बड़ी रकम खर्च की जा रही है। इतनी रकम खर्च करने के बाद बिजली कंपनियों का निजीकरण किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता। वहीं, विद्युत अधिनियम की धारा 47(5) के विपरीत सभी उपभोक्ताओं के घरों में अनिवार्य रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर से बदले जा रहे पुराने मीटरों को भी बिना उपभोक्ताओं की सहमति से प्रीपेड कर दिया जा रहा है। स्मार्ट मीटरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पांच प्रतिशत पुराने मीटर चेक ...