स्थित प्रज्ञ का क्या मतलब है, गीता में इस श्लोक से समझें क्या है स्थिति
नई दिल्ली, जून 2 -- गीता में ज्ञान की कई बातें लिखी हैं, इसमें खुशी, गम आदि की स्थिति को लेकर भी बताया गया है।गीता की ज्ञान की बातों से आपको जीवन मरण, कर्म, प्रारब्ध आदि के बारे में अच्छे से जानकारी मिल जाती हैं। फिलहाल यहां हम बात करेंगे, गीता के श्लोक के बारे में जो जिसमें स्थित प्रज्ञ लोगों के बारे में बताया गया है। ऐसे में एक कॉन्सेप्ट है स्थित प्रज्ञ। क्या है, इसका खुशी गम से क्या लेना देना है। गीता के इस श्लोक से समझें। पहले श्लोक को देख लेते हैं, फिर इसका अर्थ जान लेते हैं।दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः(स्), सुखेषु विगतस्पृहः। वीतरागभयक्रोधः(स्), स्थितधीर्मुनिरुच्यते॥ यह श्लोक सुखों से आपका बहुत अधिक खुश होने का मन ना करें और दुख में दुखी होने का मन का करें, इसे जीवन की सबसे बड़ी सफलता कही गई है। इसका अर्थ है कि आप सुख और दुख में बैलेंस कर ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.