नई दिल्ली, अक्टूबर 27 -- संयुक्त राष्ट्र महासभा में वीटो के सवाल पर आयोजित अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) सत्र को संबोधित करते हुए भारतीय प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने जो कुछ कहा, वह 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं को ध्वनि देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो साल 2020 में ही संयुक्त राष्ट्र में तार्किक सुधारों पर जोर देते हुए कहा था कि आखिर भारत को कब तक निर्णय लेने की व्यवस्था से अलग रखा जाएगा? अब पर्वतनेनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना 'वीटो पावर' के स्थायी सदस्यता दोयम दर्जे की नागरिकता सरीखी है और भारत को यह कतई मंजूर नहीं। उनकी दलील बिल्कुल सही है कि सभी स्थायी सदस्यों के पास, चाहे वे पुराने हों या नए, समान अधिकार होने चाहिए। इस समय सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों- अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन को वीटो का अधिकार प्राप्त...