औरैया, फरवरी 17 -- औरैया, संवाददाता। दस साल पहले तक कस्बे में दो चार ही फल की दुकानें होती थी। समय के साथ फल कारोबारियों और दुकानों की संख्या बढ़ती गई। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ी और मुनाफा कम हो गया। इससे फलों का ठेला या दुकान लगाकर जीवन चलाना अब चुनौतीभरा हो गया है। व्यापार में आए दिन कई तरह की दिक्क़तों से हम लोग जूझते हैं तब जाकर परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटा पाते हैं। कस्बे के स्थाई दुकानदार रोज हम लोगों के ठेले हटाने के लिए कहते हैं। जिसके दुकानदारी प्रभावित होती है। सड़क किनारे ठेला लगाने पर पुलिस और स्थानीय दुकानदार की अभद्रता भी सहनी पड़ती है। अगर नगर पंचायत की और से स्थाई दुकानें बन जाएं और सरकार आर्थिक मदद करे तो हम लोगों के परिवार भी अच्छे से जीवन जी सकेंगे। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान से चर्चा में यह दर्द बयां किया दिबियापुर कस्बे...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.