स्क्रीन की कैद में आया बचपन, मिट्टी से टूटा नाता
भदोही, जुलाई 1 -- ज्ञानपुर, संवाददाता। बच्चों के लिए मिट्टी केवल खेलने का माध्यम नहीं, बल्कि प्राकृतिक विकास की प्रयोगशाला है। सुबह-शाम मिट्टी में खेलने वाले बच्चों का शारीरिक निरोग भी होता है। अब बच्चों की जीवनशैली पूर्ण रूप से बदल चुकी है। बचपन स्क्रीन की कैद में आ गया है। छह से 12 वर्ष तक के बच्चे प्रत्येक दिन पांच से छह घंटे मोबाइल, टैबलेट, लैपटाप एवं टीवी में चलाने और देखने में दे रहे हैं। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल के सीएमएस व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय तिवारी ने बताया कि मिट्टी, पेड़-पौधे, बारिश, घास और खुले मैदान बच्चों के लिए प्राकृतिक कक्षा की तरह हैं।
प्राकृतिक खेल का महत्व यहां खेलते समय वह नई चीजें सीखते हैं, जोखिम उठाना, संतुलन बनाना और सामाजिक व्यवहार विकसित करते हैं। मिट्टी के संपर्क में आने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली म...
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