सोनभद्र, अप्रैल 12 -- केकराही, हिन्दुस्तान संवाद। निजी स्कूलों की मनमानी के चलते किताबों और कॉपियों के साथ यूनिफॉर्म के नाम पर भी अभिभावकों का जमकर शोषण किया जा रहा है। हर वर्ष यूनिफॉर्म की शर्ट या पैंट का रंग बदलकर नया खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। यूनिफॉर्म और जूता खरीदने के लिए भी स्कूल में ही दुकान खोली गई है। जिसको बाजार की दर से दुगुनी दर पर बेचा जा रहा है। साथ ही एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबों को खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। निजी स्कूलों में नर्सरी से कक्षा आठ तक कई स्कूलों में यूनिफॉर्म और किताब बदलने का खेल लंबे समय से चल रहा है। यहां तक कि प्रति वर्ष प्रत्येक कक्षा की किताबें भी बदलकर 40 प्रतिशत कमीशन पर स्कूल में ही बाकायदा दुकानें खोलकर बेची जा रही है। बाजार से कई गुना अधिक रेट पर सामान की बिक्री से अभिभाव...