लखनऊ, अगस्त 25 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक एवं राजकीय विद्यालयों के जर्जर भवनों में सुरक्षा के मद्देनजर इनका जोखिम मूल्यांकन कराया जाएगा। स्कूलों के प्रधानाचार्य एवं प्रबंधक को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। जर्जर भवनों के कक्षों की दीवार पर प्रवेश निषेध व निष्प्रयोज्य लिखवाना होगा। डीआईओएस ने सभी प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों भेजे पत्र में कहा कि स्कूल प्रबंधन नियमित रूप से भवनों का जोखिम मूल्यांकन कराएं। जर्जर छत व दीवारों की मरम्मत का काम कराएं। स्कूल में कोई निष्प्रयोज्य भवन होने पर इनमें कक्षाएं न संचालित की जाएं। दुर्घटना की स्थिति में स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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