पाकुड़, मई 11 -- जिले में पिछले सात महीनों से अपने पदस्थापन का इंतजार कर रहे सहायक आचार्यों के लिए खुशियां उस वक्त मायूसी में बदल गईं, जब उन्हें आवंटित विद्यालयों की सूची जारी हुई। विगत 8 जून को हुए पदस्थापन के बाद शिक्षकों का कहना है कि लंबी प्रतीक्षा के बाद मिला यह फल अब उन्हें 'पुरस्कार' नहीं बल्कि 'दंड' जैसा लगने लगा है। अपनी व्यथा सुनाने और पदस्थापन में सुधार की मांग को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में सहायक आचार्य समाहरणालय पहुंचे।

पदस्थापन की समस्याएं शिक्षकों ने बताया कि अधिकांश नवनियुक्त शिक्षकों का पदस्थापन उनके निवास स्थान से 30 से 70 किलोमीटर की दूरी पर कर दिया गया है। पदस्थापन की इस प्रक्रिया में महिला शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को भी नजरअंदाज किया गया है। कई महिला शिक्षकों को सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भेज दिया गया है, जिससे...