देहरादून, जून 27 -- दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र और अंकुर- एक सृजनात्मक पहल के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को बच्चे, स्कूल एवं रचनात्मकता विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान बच्चों की रचनात्मक गतिविधियों पर केंद्रित अंकुर पत्रिका के चौथे अंक का लोकार्पण भी किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चे, शिक्षक, स्कूल और रचनात्मकता स्वस्थ समाज के चार मजबूत स्तंभ हैं और विद्यालयों में बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति के अधिक अवसर दिए जाने चाहिए। गोष्ठी में संपादक, प्रकाशक और बाल साहित्य के अध्येता प्रबोध उनियाल ने कहा कि रचना शील समाज कभी संतुष्ट नहीं होता। वह तो सदैव बेहतरी के लिए विचारशील और सक्रिय बना रहता है। अंकुर के अध्यक्ष व शिक्षक मोहन चौहान ने कहा कि हम शिक्षकों का मानना है कि रचनात्मकता ही है जो हमें अन्य जीवों से अलग करती है। असिस्टेंट ...