समस्तीपुर, मई 12 -- ताजपुर। ताजपुर एवं आसपास के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले नन्हे बच्चों की पीठ पर बस्ते का बोझ आखिर कब कम होगा। यह सवाल हर वैसे अभिभावक के मन में है जिनके बच्चे निजी स्कूलों में एलकेजी, यूकेजी आदि कक्षाओं में पढ़ते हैं। महज 3-5 साल के बच्चों के बस्ते में दर्जनभर महंगी किताबें और उतनी ही कॉपियां ठुंस-ठुंसकर भरी रहती हैं। वजन इतना कि बच्चा खुद से बस्ता उठा भी नहीं पाता। निजी प्रकाशकों की चमक-दमक वाली इन किताबों की कीमत सुनकर अभिभावकों के होश उड़ जाते हैं। पहली और दूसरी कक्षा का कोर्स ही करीबन डेढ़ से दो हजार रुपये का पड़ता है। एक एक किताब 150 से 200 रुपये की होती है। विडंबना यह कि स्कूलों को प्रकाशकों से 40 से 50 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है, लेकिन अभिभावकों से किताब की पूरी कीमत वसूली जाती है। बहुत अनुनय विनय करने पर खास तरह के लो...