नई दिल्ली, अप्रैल 27 -- नई दिल्ली, प्र. सं.। हाईकोर्ट ने नाबालिग सौतेली बेटियों से दुष्कर्म के दोषी को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िताओं के बयानों में मामूली विरोधाभास मामले को कमजोर नहीं करते। उसे 15 वर्ष की सजा काटनी ही होगी। न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने सुनवाई के दौरान पीड़िताओं की मां के आचरण पर भी गंभीर टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि मां ने बच्चियों संग हो रहे अत्याचार की जानकारी होने के बावजूद कुछ नहीं किया। यही कारण था कि उस पर भी आरोपपत्र दायर हुआ। हालांकि, बाद में निचली अदालत ने उसे बरी कर दिया। पीठ ने यह टिप्पणी दोषी की उस अपील को खारिज करते हुए की, जिसमें उसने निचली अदालत के दोषसिद्धि आदेश को चुनौती दी थी।
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