सोहेलवा के जलाशय: देश का अनछुआ इको-टूरिज्म खजाना जो अब भी पहचान का इंतजार कर रहा है
लखनऊ, जून 20 -- सोहनलाल मिश्र। श्रावस्ती। एक तरफ घने जंगल, दूसरी तरफ विदेशी परिंदों की चहचहाहट, बीच में फैला विशाल जलाशय और इस सबके बावजूद सन्नाटा। न सड़क, न सुविधा, न सरकारी सुध। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग से सटे तीन जलाशय रामपुर, रनियापुर और बनघोघवा देश के सबसे उपेक्षित लेकिन सबसे संभावनाशील इको-टूरिज्म गंतव्यों में से एक हैं। चीन, रूस और यूरोप से हजारों किलोमीटर उड़कर आने वाले प्रवासी पक्षी यहां डेरा डालते हैं, थारू आदिवासी संस्कृति की जीवंत विरासत यहां सांस लेती है और ऐतिहासिक रजिया सुल्तान महल की स्मृतियां यहां गूंजती हैं। फिर भी यह क्षेत्र राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह नहीं बना पाया है। 452 वर्ग किलोमीटर का वन वैभव, पर पर्यटन शून्य यह भी पढ़ें- सोहेलवा के जलाशय: देश का अनछुआ इको-टूरिज्म खजाना ज...
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