गोड्डा, जनवरी 11 -- बोआरीजोर, प्रतिनिधि। बोआरीजोर में पांच दिवसीय आदिवासियों का महा पर्व सोहराय के दूसरे दिन गोहाल पूजा विधि विधान से किया गया। यह पर्व अच्छी खेती-बाड़ी का काम संपन्न हो जाने के बाद खुशी के तौर पर यह पर्व को मनाते हैं। सोहराय के मौके पर अपने-अपने जानवरों व खेती करने वाले समानों की पूजा-अर्चना करते हैं। सुबह में जानवरों को नहा-धुला कर उन्हें सजाया संवारा इसके बाद उन्हें चरने के लिए बाहर भेज दिया गया। इसके बाद गोहाल सहित पूरे घर को धोया-पोछा गया और उसे सजाया संवरा गया। शाम को जब पशु घर वापस आए तो उन्हें सम्मान पूर्वक नाचते-गाते गोहाल में प्रवेश कराया गया है। सोहराई के दिन लोग गोहाल में पूजा-अर्चना किया और पूरा वर्ष उनके पशु स्वस्थ्य रहें, इसकी कामना की। इस दिन को यह भी मान्यता है कि बिना पूजा किए किसी भी बाहरी व्यक्ति से कोई ...
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