देवघर, जनवरी 13 -- पालोजोरी,प्रतिनिधि। सोहराय पर्व के तीसरे दिन पर्व की परम्पराओं के अनुसार सोमवार को आदिवासी समाज के लोगों ने बरद खूंटा की परम्परा निभाई। पर्व के चौथे दिन मंगलवार को जाली की विधि पूरी की जाएगी। वहीं पांचवे व अंतिम दिन बुधवार की सेन्द्रा की परम्परा निभाने के साथ ही आदिवासी समाज का सबसे बड़ा पर्व सोहराय का समापन हो जाएगा। अंतिम दिन सेन्द्रा या सकरात माहा के दिन आदिवासी समाज सामूहिक रूप से जंगलों में शिकार करने जाते हैं। यह परंपरा या प्रथा न केवल शिकार का अवसर है बल्कि सामूहिक और सामुदायिक एकता, परस्पर सहयोग और पारंपरिक कौशल का प्रदर्शन भी है। सोहराय पर्व जो सदियों से आदिवासी समुदाय की परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा है। यह झारखंड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय में विशेष रूप से मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रू...