नई दिल्ली, जनवरी 26 -- गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जब केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों की सूची जारी की, तो राजस्थान की धरती से उठी तीन कहानियों ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ये कहानियां चमक-दमक, मंच और सुविधाओं से नहीं, बल्कि संघर्ष, साधना और समाजसेवा से गढ़ी गई हैं। रेत के बीच संगीत साधने वाला अलगोजा वादक, विलुप्त होती लोकगाथा का अंतिम रक्षक और नेत्रहीनों के जीवन में रोशनी भरने वाला संत इन तीनों नामों को इस बार पद्मश्री से नवाजा गया है।पहली कहानी: जब हवाओं के शोर से जन्मा संगीत जैसलमेर से महज सात किलोमीटर दूर मूलसागर गांव। यहां के निर्जन जंगलों में दशकों तक एक चरवाहा भेड़-बकरियों के साथ बैठकर ऐसा रियाज करता रहा, जिसे सुनकर हवाएं भी ठहर जाएं। तगा राम भील (62) नाम साधारण, लेकिन साधना असाधारण।रेगिस्तान की तपती रेत, गर्म हवाओं का श...
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