सोनम वांगचुक ने दिया श्रीलंका-बांग्लादेश का उदाहरण, बताया कब पैदा हो सकते हैं ऐसे हालात
नई दिल्ली, अक्टूबर 24 -- जलवायु एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने शनिवार को कहा कि विरोध-प्रदर्शन सरकारों को बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करने का एक बेहतरीन तरीका है। उन्होंने श्रीलंका और बांग्लादेश में हुए अशांति के घटनाक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि विरोध प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जाती है, तो ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं। आईपीएफ महोत्सव को संबोधित करते हुए वांगचुक ने कहा कि दुनिया भर के देश खुशी-खुशी विरोध प्रदर्शनों की अनुमति देते हैं और ये प्रदर्शन संसद के ठीक सामने भी होते हैं। वांगचुक ने दावा किया कि सभी देशों में संसद के सामने का स्थान विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र होता है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देशों में संसद के ठीक सामने विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति है। वांगचुक ने कहा, ''भारत में विरोध प्रदर्शन संसद से ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.