नई दिल्ली, अप्रैल 26 -- आलोक जोशी,वरिष्ठ पत्रकार आज की पीढ़ी ने पलायन की बस कहानियां ही पढ़ी थीं, जब तक कि कोरोना काल में बड़े पैमाने पर शहरों से भागते लोगों को अपनी आंखों से नहीं देख लिया। तब कौन सोच सकता था कि कुछ ही साल बाद वही नजारा फिर देखने को मिलेगा? हां, पैमाना उतना बड़ा नहीं है। इन दिनों फिर से पलायन होने लगा है। हालांकि, इस बार कारण कोई बीमारी नहीं, पेट की आग है। पिछले महीने ऐसा पहली बार हुआ कि देश के बड़े शहरों, औद्योगिक व व्यापारिक केंद्रों और बड़े-बड़े निर्माण-स्थलों पर बसे मजदूरों के लिए रोटी का इंतजाम मुश्किल हो गया और वे घर की ओर रवाना हो गए। इस संकट की जड़ तो भारत से बहुत दूर है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया और जवाबी कार्रवाई में ईरान ने होर्मुज जलमार्ग बंद कर दिया। भारत का 50 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल और गैस इस...
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