नई दिल्ली, अप्रैल 4 -- समूची दुनिया को दहलाती जंग के बीच हम भारतीय इस महीने एक विचार-युद्ध लड़ने जा रहे हैं। देश के पांच सीमावर्ती राज्य विधानसभा चुनावों के बहाने इस लड़ाई को नया आधार देंगे। ये चुनाव भारतीय राजनीति में बरसों से पोसे गए सिद्धांतों और नई उभरती सियासी सोच की दशा-दिशा का इम्तिहान भी साबित होंगे। तमिलनाडु से शुरुआत करते हैं। सन् 1967 में जिन नौ सूबों में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकारें बनी थीं, उनमें तमिलनाडु अकेला है, जहां कांग्रेस दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी। फिलवक्त कांग्रेस स्टालिन की अगुवाई वाले द्रमुक गठबंधन की साझेदार है। लंबी साझेदारी के बावजूद सीटों और सत्ता में भागीदारी के लिए दोनों दलों में खूब खींचतान चली। कांग्रेस ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में सहयोगी बनने को बेताब थी। स्टालिन को सत्ता में साझेदारी मंजूर नहीं थी, ल...