सैकड़ो लोगों ने रखा निर्जला एकादशी व्रत
जहानाबाद, जून 25 -- किंजर, निज संवाददाता। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इस निर्जला एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। पंडित सुमित कुमार मिश्रा के अनुसार इस एकादशी में अन्न के साथ-साथ जल को भी त्याग करना पड़ता है। ऐसी मान्यता है कि इस एक व्रत का पालन करने से पूरे साल की 24 एकादशी का फल की प्राप्ति होती है। पंडित सुमित मिश्रा ने बताया कि महाभारत काल में जब भीम को भूख से सहन न होने के कारण उपवास रखने में कठिनाई होने लगी तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें बिना जल के इस एक व्रत को करने का सुझाव दिया था। यह भी पढ़ें- सैकड़ो लोगों ने रखा निर्जला एकादशी व्रत पंडित मिश्रा के अनुसार पुराणों में वर्णित है कि इस दिन विधि विधान से व्रत रखने वाले को सभी ज्ञात अज्ञात पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु की बाद उन्हें बैकुंठ धाम में स्थान मिलती है। यह व्र...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.