बस्ती, मार्च 17 -- बस्ती, निज संवाददाता। पशु, पक्षी और कीट पतंगों के अंदर समझ होती है। इसलिए वह भोजन और सुरक्षा को साझा करते हैं। यह विचार आर्य समाज गांधीनगर बस्ती के वार्षिकोत्सव में व्यक्त करते हुए वैदिक चिंतक योगेश भारद्वाज ने कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ मिलकर जन प्रजा हो जाती है। प्रजा का तात्पर्य समझदार से है जो प्रजा शिक्षा से परिपूर्ण होती है। कार्यक्रम में कानपुर से आए वैदिक विद्वान रविंद्र आर्य ने कहा कि परिवार के बड़े बुजुर्गो का जहां सेवा एवं आदर होता है। परिवार निरंतर आगे बढ़ने के साथ ही साथ सभी लोग सुखी होते हैं। इस दौरान ओम प्रकाश आर्य,गरुड़ध्वज पांडेय, मुरलीधर भारती, बृजेश आर्य, सत्येंद्र वर्मा, घनश्याम सिंह, सुमन आर्य सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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