सेवा का उद्देश्य लोकमंगल होना चाहिए: मुनि प्रमाण सागर
गिरडीह, अगस्त 12 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। धर्म का उद्देश्य धन, वैभव अथवा सांसारिक सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर शांति, संतोष व समत्व और आत्मबल का विकास करना है। धर्म कष्टों को समाप्त करने का वचन नहीं देता, बल्कि कष्टों के बीच भी प्रसन्न, धैर्यवान और स्थिर बने रहने की शक्ति प्रदान करता है। उक्त बातें मधुबन स्थित गुणायतन में आयोजित प्रवचन सभा मे राष्ट्र संत मुनि प्रमाण सागर जी महाराज बोल रहे थे। शंका समाधान कार्यक्रम से जुड़ी प्रवचन सभा में ऑनलाइन भारत सहित अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, दुबई, लंदन सहित अन्य देशों के हजारों श्रद्धालु प्रवचन को आत्मसात करने जुटे थे। प्रवचन सभा में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि अच्छे कर्म का फल अच्छा और बुरे कर्म का फल बुरा ही मिलता है, लेकिन मनुष्य धर्म के फल को केवल भौ...
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