नई दिल्ली, फरवरी 17 -- राज शुक्ला,लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी तकनीक अब सैन्य क्षेत्र में भी पीढ़ीगत बदलाव का वाहक बन गई है। यह सामरिक क्षमताओं को नए सिरे से परिभाषित कर रही है। हम फिलहाल एआई, साइबर, क्वांटम जैसी प्रौद्योगिकी के तूफान से गुजर रहे हैं, जिसकी जद में वैश्विक व्यवस्था और सुरक्षा, दोनों हैं। कैसे? एक उदाहरण से समझाने की कोशिश करता हूं। यूक्रेन में अमेरिकी एआई कंपनी पैलांटिर ने एआई पर आधारित गोथम कमांड और कंट्रोल सॉफ्टवेयर तैनात किया है, जो सैटेलाइट डाटा, सोशल मीडिया पोस्ट, सैनिकों के 'वाइड एरिया नेटवर्क', यानी डब्ल्यूएएन उपकरण, रेडियो फ्रिक्वेंसी आदि सबका विश्लेषण करता है और करीब 1,000 किलोमीटर लंबी उसकी सरहद की रक्षा करता है। यह सुरक्षा तंत्र इस कदर मजबूत है कि सीमा पर कोई भी हरकत हुई, तो घुसपैठिए...
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