डॉ. प्रकाशचंद्र गंगराड़े, दिसम्बर 23 -- सूर्योपनिषद् के अनुसार समस्त देव, गंधर्व, ऋषि सूर्य रश्मियों में निवास करते हैं। स्कंदपुराण में कहा गया है, सूर्य को अर्घ्य दिए बिना भोजन करना पाप के समान है। संक्रांतियों तथा सूर्य षष्ठी के अवसर पर सूर्य की उपासना का विशेष विधान बनाया गया है। सामान्यता रविवार को सूर्य की उपासना की जाती है। वैसे प्रतिदिन प्रातःकाल रक्तचंदन से मंडल बनाकर तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, चावल, लाल फूल रखकर सूर्य की ओर मुख करके कलश को छाती के सामने बीचोबीच लाकर सूर्य मंत्र, गायत्री मंत्र का जाप करते हुए जल की धारा धीरे-धीरे प्रवाहित कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर परिक्रमा एवं नमस्कार करते हैं। इससे भगवान सूर्य प्रसन्न होकर आयु, आरोग्य, धन-धान्य, क्षेत्र, पुत्र, मित्र, तेज, यश, कांति, विद्या, वैभव और सौभाग्य आदि प्रदान कर...