संतकबीरनगर, अप्रैल 29 -- हिन्दुस्तान टीम, संतकबीरनगर। क्षेत्र के सांड़े कला से पंडितपुर होते हुए पिड़ारी कला तक बहने वाली बूढ़ी राप्ती नदी वर्तमान में स्वयं के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। कभी कल-कल करती लहरों से लबरेज रहने वाली यह नदी आज सूखकर जगह जगह रेत के टीलों में तब्दील हो चुकी है। नदी का प्रवाह पूरी तरह अवरुद्ध होने से न केवल जलचरों का जीवन संकट में है, बल्कि क्षेत्र के घुमंतू और जंगली जानवर बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर भटकने को विवश हैं。 यह भी पढ़ें- प्रचंड गर्मी से सूखे तालाब और नहरेंजल संकट की गंभीरता साड़े कला से लेकर पिड़ारी कला तक नदी का पेट पूरी तरह सूख चुका है। नदी में पानी का नामोनिशान न बचने के कारण भीषण जल संकट खड़ा हो गया है। स्थिति इतनी विकट है कि प्यास से व्याकुल नीलगाय, जंगली सूअर और अन्य घुमंतू जानवर अब आबादी वाले क्षेत्रो...
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