गोरखपुर, अगस्त 20 -- गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों के एक महत्वपूर्ण शोध कार्य को भारत सरकार के कॉपीराइट कार्यालय से कॉपीराइट प्रमाणपत्र मिला है। यह शोध बायोचार-मीडिएटेड रिजनरेशन ऑफ द फोटोसिंथेटिक एपरेटस ऑफ फिंगर मिलेट (एल्यूजाइन कॉराकाना) अंडर ड्रॉट स्ट्रेस शीर्षक से पंजीकृत किया गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह शोध भविष्य में सूखा प्रभावित क्षेत्रों की खेती के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। इससे बायोचर की उपयोगिता का पता चला है। इसके जरिए रागी के पौधे को सूखे से बचाया जा सकेगा। यह भी पढ़ें- डीडीयू में 'श्रीगोरक्ष औषधि वाटिका' का हुआ उद्घाटनशोध का उद्देश्य अध्ययन में बताया गया है कि बायोचार (कार्बन युक्त जैव पदार्थ) का प्रयोग कर फिंगर मिलेट यानी रागी के पौधों क...