बांका, मार्च 29 -- कटोरिया (बांका), निज प्रतिनिधि। सुबह की पहली किरण के साथ जब कटोरिया एवं चांदन के किसान अपने खेतों की ओर बढ़ते हैं, तो उनके कदमों में उम्मीद से ज्यादा चिंता दिखाई देती है। आंखों में फसल के अच्छे दाम का सपना होता है, लेकिन दिल में यह डर भी बना रहता है कि कहीं मौसम, पानी की कमी या बाजार की बेरुखी उनकी महीनों की मेहनत पर पानी न फेर दे। यही डर और अनिश्चितता आज कटोरिया की खेती की सबसे बड़ी पहचान बन गई है। उपजाऊ जमीन, मेहनती किसान और बेहतर उत्पादन क्षमता होने के बावजूद यह इलाका अब भी कृषि सुविधाओं के अभाव में पिछड़ेपन की मार झेल रहा है। कटोरिया एवं चांदन प्रखंड के में खेती आज भी काफी हद तक देववृष्टि यानी बारिश पर निर्भर है। खरीफ में धान और मकई किसी तरह किसानों की उम्मीद बचाए रखते हैं, लेकिन अभी चल रहे रबी सीजन में बड़ी संख्या ...