सुल्तानपुर, नवम्बर 1 -- मोतिगरपुर ,संवाददाता। रासलीला कोई सांसारिक प्रेम नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है', जो हमें यह सिखाती है कि जब मनुष्य अपने अहंकार और मोह को त्याग देता है, तब वह भगवान के साथ एकाकार हो जाता है। पहाड़पुर सराय भीषम में कथा स्थल पर छठें दिन रासलीला का वर्णन करते हुए आचार्य प्रहलाद कृष्ण महाराज ने उक्त बातें कहीं तो भक्तजन भावविभोर होकर झूम उठे। रासलीला के उपरांत कंस वध प्रसंग में आचार्य महाराज ने बताया कि अधर्म, अन्याय और अहंकार का अंत सदैव सत्य और धर्म की विजय से होता है। जब भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया, तो पूरे ब्रज में धर्म की स्थापना हुई। यह प्रसंग सुनते ही श्रोताओं ने "जय श्रीकृष्ण" के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान कर दिया। रुक्मिणी विवाह के प्रसंग में आचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और देवी र...
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