नई दिल्ली, मार्च 23 -- हिंदू धर्म में आलता को सोलह श्रृंगार का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। शादीशुदा महिलाएं हर तीज-त्यौहार या किसी भी शुभ मौके पर पैरों में आलता जरूर लगाती हैं। इसके लाल रंग से महिलाओं के पैरों की खूबसूरती और निखर जाती है और पूरा रूप और भी आकर्षक लगने लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज महिलाओं के सोलह श्रृंगार का अहम हिस्सा बन चुका यह आलता आखिर शुरू कहां से हुआ? कैसे एक साधारण सा लाल रंग परंपरा और संस्कृति की पहचान बन गया? और क्यों हर शुभ मौके पर इसे लगाना जरूरी माना जाता है? चलिए जानते हैं क्या है आलता का इतिहास और इससे जुड़ी परंपरा।आलता क्या होता है? आलता एक लाल रंग का लिक्विड होता है जिसे महिलाएं अपने पैरों और कभी-कभी हाथों में लगाती हैं। पहले के समय में इसे घर पर ही प्राकृतिक चीजों जैसे लाख या फूलों के रंग से ब...