सुरों से सजी काव्य पथ की बारहवीं शाम
प्रयागराज, जुलाई 19 -- काव्य पथ के बारहवें संस्करण का आयोजन रविवार को हिन्दुस्तानी एकेडेमी के सभागार में हुआ। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विक्रम सिंह ने 'अब के फागुन मुझको भी गांव में अपने जाना है' की प्रस्तुति से श्रोताओं को सराबोर किया तो शिवराम उपाध्याय ने 'मधुशाला मतवालों की' प्रस्तुति से समा बांधा। जितेंद्र जलज ने 'सब तो अपने अपने में हैं सन्नाटे को तोड़े कौन', यश मालवीय ने 'आओ भाई राम सुभग' व विन्रमसेन ने गीत 'दुआ धूल धक्कड़ में' की प्रस्तुति की। कार्यक्रम में सुनील दानिश, अमरजीत राम, डॉ. पियूष मिश्र, डॉ. एससी गुप्त व मनमोहन सिंह तन्हा ने भी काव्य पाठ किया। यह भी पढ़ें- Gaya News: 'आज खुश हुई वर्षा रानी, झमझमा बरसा पानी .. .. इस दौरान काव्य पथ की पत्रिका का विमोचन किया गया...
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