गिरडीह, अगस्त 3 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के अनवरत नक्सल विरोधी अभियानों के कारण नक्सलियों के अभेद्य किले के रूप में पहचाने जाने वाले पारसनाथ क्षेत्र में नक्सली आतंक का किला ढ़ह गया है। पुलिस की आधुनिक तकनीक, मजबूत खुफिया तंत्र और पहाड़ी के चारों तरफ सीआरपीएफ कैंपों की स्थापना के कारण लगभग चार दशक बाद पारसनाथ से 'लाल आतंक' का सफाया संभव हो सका है।

नक्सलवाद का इतिहास जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध नक्सलबाड़ी आंदोलन की चिंगारी लगभग 40 साल पहले पारसनाथ क्षेत्र तक पहुंची थी। पीरटांड़ की दुर्गम भौगोलिक बनावट, घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों का फायदा उठाकर माओवादी विचारधारा धीरे-धीरे फैलती गई। उस दौर में अत्यंत पिछड़ा क्षेत्र होने के कारण कई लोगों ने महाजनी प्रथा के शोषण से तंग आकर तो कई बेरोज...