रामपुर, अप्रैल 4 -- महिला सुरक्षा के तमाम कानून। मिशन शक्ति जैसी योजनाएं। इसके बाद भी महिलाएं हो रही हैं उत्पीड़न का शिकार। दहेज एक्ट के बाद भी दहेज का दानव न जाने कितने परिवारों को तोड़ रहा है तो हर बार सजा मिलती है महिलाओं को। ससुराल को सजाने संवारने का ख्वाब संजोने वाली विवाहिताएं मायके में छिप छिप कर रोने को मजबूर हैं तो थानों की दहलीज पर पहुंच न्याय मांग रही हैं। कानूनों के पालन में कहीं न कहीं तो ढिलाई है अन्यथा यूं कानूनों के बाद भी महिला उत्पीड़न के आरोपियों के हौसले बुलंद नहीं होते। इसका ही परिणाम है कि जिले में हर साल दहेज उत्पीड़न के मामले बढ़ते जा रहे है। हाल ही में दर्ज हुए कुछ मामले इस बात की गवाही दे रहे है।पति ने दिया तलाक तो जेठ ने की छेड़छाड़रामपुर। शाहबाद थाना क्षेत्र निवासी एक महिला ने केस दर्ज कर बताया था कि उसके ससुराल वाले...
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