नई दिल्ली, अप्रैल 24 -- सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में 15 साल की नाबालिग लड़की को 28 हफ्ते से ज्यादा की गर्भावस्था खत्म करने की इजाजत दे दी है। सुनवाई के दौरान SC ने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला, खासकर नाबालिग को, उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने मामले को संवेदनशील बताते हुए कहा कि अगर महिला को जबरन गर्भ जारी रखने के लिए कहा जाए, तो उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा और उसकी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, "कोई भी अदालत किसी महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ पूरी अवधि तक गर्भ रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।" सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अपने शरीर और प्रजनन से जुड़े फैसले लेना हर महिला ...
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