नई दिल्ली, सितम्बर 8 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में सुनवाई लंबे समय तक चलने का इतिहास रहा है। इसकी एक बड़ी वजह अक्सर अनावश्यक और बहुत ज्यादा सबूत पेश किया जाना है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने की। पीठ ने 1993 में दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में एक व्यक्ति को बरी कर दिया। यह भी पढ़ें- सीसीटीवी फुटेज ने 14 साल बाद आरोपियों को इंसाफ दिलायाभ्रष्टाचार के मामलों में सबूत पीठ ने कहा कि हम यह देखे बिना नहीं रह सकते कि भ्रष्टाचार के मामलों में बहुत बड़ी मात्रा में सबूत पेश किए जाते हैं। यह अक्सर अदालत के लिए परेशानी पैदा करने वाला होता है, खासकर तब, जब सबूत के रूप में पेश किए जाने वाले कई पहलू आरोप को साबित करने या आरोपी सरकारी कर्मचारी का अपराध साबित करने में कोई ख...