नई दिल्ली, जून 28 -- Supreme Court News: देर से मिला न्याय, न्याय न मिलने के बराबर है... यह एक ऐसा कानूनी सिद्धांत है जिसे देश की अदालतें अक्सर दोहराती हैं। हाल ही में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी एक कार्यक्रम में बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि "देर से मिला न्याय, न्याय की हत्या के समान है।" लेकिन विडंबना यह है कि निचली अदालतों और हाईकोर्ट पर मुकदमों के बोझ का सवाल उठाने वाली देश की सबसे बड़ी अदालत यानी कि सुप्रीम कोर्ट खुद कई बार फैसलों में इतनी देरी कर देती है कि न्याय के मायने ही खत्म हो जाते हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां गैर-इरादतन हत्या के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट को अंतिम फैसला सुनाने में लगभग 14 साल का लंबा वक्त लग गया। इस बेहद लंबी कानूनी लड़ाई का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि जब तक देश...