नई दिल्ली, मई 18 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हिंसा की साजिश के आरोप में आतंकवाद निरोधक कानून के तहत जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं दिए जाने के अपने ही फैसले की आलोचना की। शीर्ष अदालत ने 'जमानत एक नियम है और जेल अपवाद' बताते हुए कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले में इस सिद्धांत का पालन नहीं किया गया। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि 'जमानत नियम है, जेल अपवाद' का सिद्धांत आतंकवाद निरोधक कानून 'यूएपीए' के तहत दर्ज मामलों में भी लागू होता है। पीठ ने कहा कि यूएपीए की धारा 43 डी(5) के तहत वैधानिक रोक संविधान के अनुच्छेद की गारंटी के अधीन ही होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि इसलिए, हमें यह कहने में कोई भी संकोच नहीं है कि यूएपीए के तहत भी, जमानत नियम है और जेल अपवाद है। ...