नई दिल्ली, अप्रैल 18 -- सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस संजय करोल ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए 4 नए श्रम संहिताओं को भारत की श्रम व्यवस्था में एक युगांतरकारी बदलाव करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह भारत की बिखरी हुई श्रम प्रणाली को एक समावेशी और सुसंगत ढांचे में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय को एक साथ आगे बढ़ाना है। इस दौरान उन्होंने वकीलों को कुछ फिल्में देखने की नसीहत भी दी। सुप्रीम कोर्ट की इकाई अधिवक्ता परिषद द्वारा अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए जस्टिस करोल ने इन सुधारों और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के योगदान पर विस्तार से चर्चा की। जस्तीस करोल ने अपने संबोधन में एक दिलचस्प बात कही। उन्होंने बताया कि कैसे हिंदी सिनेमा ने दशकों तक श...