सुपौल, अगस्त 14 -- त्रिवेणीगंज, निज प्रतिनिधि। कोसी क्षेत्र की धरती केवल प्राकृतिक आपदाओं और संघर्षों के लिए ही नहीं, बल्कि देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए हुए आजादी के संग्राम में दिए गए अपने ऐतिहासिक और अतुलनीय योगदान के लिए भी जाना जाता है । वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान सुपौल जिले के युवाओं की टोली और नागरिकों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर खड़े होकर संघर्ष का नेतृत्व किया था। जिले के दर्जनों युवाओं ने अपनी पढ़ाई-लिखाई छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद कर मजबूती से आंदोलन की कमान संभाली, गिरफ्तारियां दीं और जेल की सख्त यातनाएं सहीं। आजादी के आठ दशक बाद भी इन वीरों की गाथाएं नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। ​ यह भी पढ़ें- जहां तिरंगा फहराने के लिए फुलेना प्रसाद ने दी शहादत, वहीं ...