सुपौल, फरवरी 16 -- सुपौल, वरीय संवाददाता। बेटे-बेटी में फर्क समझने वाले एक पिता ने बेटी को पढ़ाई करने से रोक उसे घर का काम-काज सीखने और उसकी शादी कराने की जिद ठान ली। पिता के इस फैसले से मायूस बेटी ने अपने जीवन से हारकर गलत कदम उठाने की कोशिश की, लेकिन उसकी शिक्षिका ने उसका मार्गदर्शन किया और उसकी पढ़ाई भी जारी रही। करीब 15 साल बाद जब उसी बेटी ने नशे की लत से बीमार पिता की जान बचाई तो उनकी आंखों से आंसू छलक उठे। दरअसल, अभिनय के माध्यम से छोटे-छोटे स्कूली बच्चों ने समाज में व्याप्त बेटा-बेटी में फर्क करने की कुरीति पर जमकर प्रहार किया। बच्चों ने ऐसे अभिभावकों को इस नाटक के माध्यम से बड़ी सीख दी। मौका था जिला मुख्यालय के मरीचा स्थित डीपीएस के वार्षिकोत्सव का। इससे पूर्व कोसी रेंज के डीआईजी कुमार आशीष, एसपी सरथ आरएस, नगर परिषद अध्यक्ष राघवें...
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