सुपौल, दिसम्बर 13 -- कुनौली, निज प्रतिनिधि। किसानों के लिए वाकई यह बहारों का मौसम है। धान की कटनी अंतिम चरण पर चल रही है। लक्ष्मी खलिहानों में हैं। काफी मेहनत और लागत से उपजाई धान की फसल को देखकर किसान खुश हो रहे हैं। लेकिन साथ ही इस बात का गम भी उन्हें सता रहा है कि तैयारी के बाद यह फसल उनकी नहीं रहेगी। इसे बेचकर गेहूं ती खेती करनी होगी। महाजनों का कर्ज चुकाना होगा। बेटे की पढ़ाई औक बेटी की शादी तो अगले साल के लिये टाली जा सकती है पर मां-बाप की दवा का इंतजाम भी तो इसी से करना है। उस पर से खाद की कालाबाजारी कोढ़ में खाज की तरह किसानों को परेशान कर रही है। सरकारी दर पर खाद की उपलब्धता की बात तो दूर कालाबाजारी से खरीदी गई खाद भी असली है या नकली इसकी भी जानकारी उनको नहीं है। यह तो जीवटता, धैर्य की परकाष्ठा या फिर मजबूरी है किसानों की अन्यथा ...
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