सुपौल, मार्च 25 -- त्रिवेणीगंज, मनोज रोशन। अनुमंडल क्षेत्र के लक्ष्मीनियां गांव में कभी आत्मनिर्भरता की मिसाल रहा चरखा केंद्र आज वीरान पड़ा है। आजादी के दिनों में महात्मा गांधी के प्रवास और उनके द्वारा चरखा चलाने से यह गांव खास पहचान रखता था, लेकिन अब वही केंद्र उपेक्षा का शिकार होकर खामोश हो गया है। गांधीजी की याद में स्थापित इस चरखा केंद्र से कभी सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई थी। गांव की महिलाएं और पुरुष यहां चरखा चलाकर सूत कातते थे, जिससे न केवल रोजगार मिलता था, बल्कि आत्मनिर्भरता का संदेश भी मजबूत होता था। समय के साथ केंद्र की गतिविधियां बंद होती चली गईं और आज स्थिति यह है कि भवन जर्जर हो चुका है और परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है। चरखा केंद्र के बंद होने से सैकड़ों परिवारों की आय का स्रोत खत्म हो गया है। दर्जनों लोग जो सीधे ...