सुपौल, दिसम्बर 14 -- त्रिवेणीगंज, निज प्रतिनिधि। कोसी-सीमांचल का इलाका इन दिनों एक अनकही उम्मीद और उपेक्षा की कहानी बुन रहा है। इस इलाके में खेतों में बांस की लंबी लहलहाती कतारें हर जगह दिखती हैं। किसानों के लिए यह केवल एक पौधा नहीं बल्कि हर मौसम में पैसा देने वाला एटीएम है। लेकिन सरकारी घोषणाओं के बाद भी न तो इनकी उन्नत किस्म मिलती हैं , न ही किसानों को उचित कीमत मिल रही हैं। बांस की खेती को प्रोत्साहन देने वाली सरकारी योजनाएं धरातल पर उतरने के बजाय सरकारी फाइलों में ही बंद है। किसानों को इंतजार है किसी भागीरथ का जो इन्हें सरजमी पर उतार सके। कोसी की उपजाऊ और नम मिट्टी बाँस की खेती के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है। यही वजह है कि यहां के किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बांस भी उगाते रहे हैं। वैसे डोम जाति के हजारों परिवारों के लिए बांस न के...
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