नई दिल्ली, जनवरी 23 -- बिहार के मखाना की पिछले एक दशक में पूरी दुनिया में 'सुपर फूड' के रूप में पहचान बनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई सार्वजनिक समारोहों मे कह चुके हैं कि वह सुबह के नाश्ते में मखाना खाते हैं। इसकी खेती और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए मखाना बोर्ड की स्थापना को मंजूरी दी जा चुकी है। लेकिन बिहार की नई पीढ़ी मखाने का खेती से दूर हो रही है। सरकार के स्तर पर मखाना की वैश्विक ब्रांडिग से भी इसकी पहुंच 55 से अधिक देशों तक हो चुकी है। पिछले साल केंद्र ने मखाना बोर्ड की मंजूरी दी। मांग बढ़ने से खेती का रकबा भी बढ़ा है। पर, इसकी खेती- उत्पादन के प्रति नई पीढ़ी का आकर्षण न केवल कम हो रहा है, बल्कि वह खुद को इससे अलग भी कर रही है। कुशल मजदूरों की कमी भी बड़ी समस्या है। यह मखाना उत्पादन के भविष्य की सबसे चिंता का विषय है। यह...