रिषिकेष, अप्रैल 27 -- प्रतीतनगर स्थित कौटिल्य वाटिका वेडिंग प्वाइंट में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन भागवत भूषण आचार्य रमेश उनियाल ने सुदामा प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में यह प्रसंग सच्ची मित्रता, त्याग और भक्ति का अद्वितीय प्रतीक है, जो समाज को प्रेम, विनम्रता और समर्पण का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि सुदामा अत्यंत गरीब ब्राह्मण थे, जबकि उनके बालसखा भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बने। आर्थिक तंगी से जूझते सुदामा पत्नी के आग्रह पर श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे और संकोचवश चावल का छोटा सा उपहार साथ ले गए। द्वारिका पहुंचने पर श्रीकृष्ण ने उनका भव्य स्वागत किया, स्वयं चरण धोए और अत्यंत सम्मान दिया। सुदामा ने अपनी गरीबी का जिक्र नहीं किया, लेकिन श्रीकृष्ण ने बिना कहे ही उनकी स्थिति समझ ली...