बुलंदशहर, मई 27 -- नगर के श्री राजराजेश्वर मंदिर में चल रहे हरि नाम संकीर्तन मंडल के 52वें वार्षिक महोत्सव के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को समापन हो गया। कथा के सातवें और अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण और उनके बाल सखा सुदामा की अटूट मित्रता का प्रसंग सुनकर पांडल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और आंखें नम हो गईं। वृंदावन से पधारे प्रख्यात कथावाचक धनंजय महाराज ने अंतिम दिन सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष और कलयुग में संकीर्तन की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सच्चा मित्र वही है जो नि:स्वार्थ भाव से विपत्ति में साथ दे। यह भी पढ़ें- सुदामा चरित्र व श्रीकृष्ण विवाह प्रसंग के साथ कथा का समापन सुदामा द्वारा प्रेमपूर्वक लाए गए चावल के दानों के बदले भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें बिना मां...